Sunday, February 23, 2014

वर्त मान ही सत्य है


आगे भी जाने तू, पीछे भी जाने तू
जो भी है, बस यही एक पल है

अन्जाने सायों का राहों में डेरा है
गुरु की  बाँहों ने  हम सबको घेरा है
ये पल उजाला है बाक़ी अंधेरा है          
ये पल गँवाना ये पल ही तेरा है
खोजी  सोच ले यही वक़्त है कर ले पूरी आरज़ू
आगे भी ...



सरश्री के श्रवणों से जिंदगी संवारी है
मनन और ध्यान से मोक्ष की तैयारी  है
इस पल के होने से दुनिया हमारी है
ये पल जो देखो तो सदियों पे वारि है
जीनेवाले सोच ले यही वक़्त है 
 कर ले पूरी आरज़ू
आगे भी ...




इस पल के साए में अपना ठिकाना है
इस पल की आगे की हर शय फ़साना है
कल किसने देखा है कल किसने जाना है              
हमको गुरु ज्ञान ने येही बताया है 
खोजी  सोच ले यही वक़्त है 
कर ले पूरी आरज़ू
आगे भी ...


Wednesday, February 19, 2014

कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती

लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती.         
नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है,
चढ़ती दीवारों पर, सौ बार फिसलती है.
मन का विश्वास रगों में साहस भरता है,
 चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता है.
आख़िर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती






  डुबकियां सिंधु में गोताखोर लगाता है,
     जा जा कर खाली हाथ लौटकर आता है.      
       मिलते नहीं सहज ही मोती गहरे पानी में  
          बढ़ता दुगना उत्साह इसी हैरानी में                
                          मुट्ठी उसकी खाली हर बार नहीं होती                              कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती              









असफलता एक चुनौती है, इसे स्वीकार करो,
क्या कमी रह गई, देखो और सुधार करो.
जब तक न सफल हो, नींद चैन को त्यागो तुम,
संघर्ष  का मैदान छोड़ कर मत भागो तुम                        
कुछ किये बिना ही जय जय कार नहीं होती
 कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती.


                                                                               

बनना है महान तो करे अपना सम्मान

प्रिय दोस्तों,
क्या आपने अपने आस पास ऐसे  लोगो को देखा  है जो हमेशा कभी अपने को कभी तक़दीर  को या फिर परिस्थितिओं को दोष देते रहते है ? कहीं आप भी तो उन लोगो के जैसे तो नहीं है? यदि हाँ तो सावधान हो जाइये क्योकिं आप अपनी ताकत का बहुत बड़ा भाग असम्भव को सम्भव  बनाने में खर्च कर रहे है। दरअसल आप बाहरी परिस्थितिओं को एक सीमा से ज्यादा कंट्रोल नहीं कर सकते है,इसलिए आपको अपनी आन्तरिक परिस्थितिओं को बनाने वाले मन पर काम करना पड़ेगा। और इसके लिए विशेष प्रशिक्षण और अभ्यास की जरुरत पड़ेगी। प्रशिक्षण आसान है लेकिन बिना निरंतर अभ्यास के प्रशिक्षण प्रभावी नहीं होता इसलिए अपेक्षित परिणाम पाने के लिए आपको अपने आप से वचनबद्ध करना आवश्यक है।

आइए जरा यह समझने की कोशिश करे की जब हम अन्दर से परेशान होते है तो हमें ज्यादातर चीजे ख़राब क्यों लगने लगती है और क्यों खुश  होने पर वही चीजे अच्छी लगती है।असल में आपके चारो तरफ वही सबकुछ होता है जो आपके अन्दर चल रहा होता है। इसलिए बाहर की परिस्थितियो को ठीक करने के लिये हमें अपने ऊपर ही काम करना है।दरअसल आपके चारो तरफ की दुनिया आपके अन्दर जो कुछ चार रहा है उसका एक प्रतिबिम्ब मात्र है।

जिस  समय आप अस्तव्यस्त और अव्यवस्थित होते है तो आपके बाहर की दुनिया में लोग तनाव पूर्ण और
गुस्से में करते हुए मिलेंगे। जाहिर है की ऐसा कोई जान बूझ कर नहीं कर रहा है लेकिन यदि आप कुछ पुरानी  घटनाओ का विश्लेषण करेंगे तो आप को इनमे आपस का सम्बन्ध स्पष्ट हो जायेगा।

अब अपने अन्दर क्या परिवर्तन लाना है ताकि स्थितियो में सुधार हो  और इसको कैसे लायेंगे पर जरा विचार कर ले।यह परिवर्तन लाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण और पहल कदम है अपने लिए समय निकालना। आमतौर पर हम दिनभर नित्य के कामो में इतना व्यस्त रहते है की अपने लिए समय ही नहीं बचता। इसका सबसे अच्छा और उचित उपाए यह है की आप जितने बजे भी सो कर उठते है उसमे आधा घंटे का समय कम करे और इस समय का उपयोग दस मिनट मौन में बैठ कर ईश्वर  से  दिन के शुभ और  दिनभर किये जाने वाले प्रयासों को सार्थक बनाने की प्रार्थना करे। अपनी दिनचर्या में प्रातः दस -पंद्रह मिनट का समय अच्छे स्वास्थ्य के लिए व्यायाम करके शुरू करे. प्रार्थना और व्यायाम से शुरू किया जाने वाला दिन आपके लिये अति शुभ परिणाम लायेगा  .

आपके साथ दूसरे अच्छा व्यहार करें इसकेलिए आवश्यक है कि परिवर्तन अपने अन्दर लाने  का प्रयास करें। 
 जब आप हर रोज अपने आप को अंदर से बेहतर बनाने के लिए प्रयास करते है, तो आपको दूसरों के द्वारा आप के साथ किये जाने वाले परिवर्त्तन का एहसास शुरू हो जाएगा। आप अंदर से जितना शांत होते जायेंगे आपका जीवन उतना ही शान्त और सुंदर होना शुरू हो जायेगा।आप जितना प्रसन्न रहना शुरू करेंगे आप के जीवन में शान्ति आनी  शुरू होगी आपके निर्णय अच्छे होते चले जायेंगे और सफलता आपके पीछे पीछे चलेगी। याद रखिये मुस्कराने के लिए सफलता का इन्तजार करने कि जगह आप मुस्कराना शुरू कर दीजिये और आप सफल होना शुरू हो जायेंगे।



अजय सिंह 

Wednesday, January 15, 2014

मेरे सदगुरु





  कहाँ मुझ में कोई कमाल  रखा है ,"मेरे मालिक "मुझे तूने ही संभल रखा है
  मेरे ऐबो पर दाल के परदा, मुझे अच्छे लोगो के साथ डाल  रखा है
    मेरा नाता अपनों से जोड़ कर,तूने हर मुसीबत को टाल रखा है
मैं तो कब का मिट गया होता ,सतगुरु बस तेरी रहमतो ने मुझे संभल रखा है 

Monday, August 5, 2013

मेरा भजन

है दुनिया उसीकी जमाना उसीका 
श्रवण कर  के जो हो गया हो गुरु का ll

लुटा है जो खोजी सच के सफ़र में 
है जन्नत गुरुद्वारा उसकी नजर में 
उसी ने है लूटा मजा जिन्दगी का 
श्रवण कर  के जो हो गया हो गुरु का ll 

है सजदे के काबिल हर वह दीवाना 
जो बन गया है गुरु का खजाना 
करो यारो इज्जत उसकी दीवानगी का 
श्रवण कर  के जो हो गया हो गुरु का ll 

गुरु आज्ञा में रहना जिसकी अदा 
ध्यान और मनन जिसकी क्रिया है
सताएगा क्या गम उसे जिन्दगी का 
 श्रवण कर  के जो हो गया हो गुरु का ll
 
है दुनिया उसीकी जमाना उसीका 
श्रवण कर  के जो हो गया हो गुरु का ll


Tuesday, May 14, 2013

हारिये न हिम्मत बिसारिये न राम

 हारिये न हिम्मत बिसारिये न राम, के मूल मंत्र में जीवन की सफलता का रहस्य छुपा हुआ है।कठिन से कठिन परिस्थितियो में भी हिम्मत न हारने वाला मनुष्य जीवन में ऊंचाई को प्राप्त कर ही लेता  है।परमेश्वर ने जितनी सम्भावनाये आगे बढ़ने की मनुष्य मात्र को दे रखी है शायद किसी और को नहीं।परन्तु आज का मानव कही न कही अपनी वरिष्ठता, विशिष्टता एवं क्षमता को पहचानने में नाकाम दिखता दिख रहा है।आत्मविकास की बात तो करना दूर की बात है,थोड़ी बहुत बाधाओ  से ही मनुष्य घबड़ाने लगता है।वह अपने अन्दर छिपी शक्ति को पहचान नहीं पा पाता है और संघर्ष करने से घबड़ाता है परन्तु यह समझना अवशयक है की जब हिम्मत साथ होगी,तभी परिणाम की सिद्धी  होगी।

साधारण व्यक्ति जहाँ केवल चिंतन और कर्म का ही भार वहन  करते है वहीँ हिम्मती व्यक्ति आत्म  निरिक्षण, आत्म सुधार और आत्म निर्माण को भी अपने प्रयासों में सम्मिलित करते है।ऐसे  व्यक्ति हर नये दिन को नये  जन्म के रूप में आरंभ करते है। इसलिए जीवन में कई बार मन को संकल्पित किये जाने की आवश्यकता होती है।

इतिहास साक्षी है की जिन्होंने भी परमेश्वर की अनुकम्पा को अनुभूत करते हुए अपने कार्यो को परणित करने का प्रयास किया है वे अवश्य ही सफल हुए है।सकारात्मक सोच रखते  हुए निर्भयता पूर्वक कार्य के प्रति संलग्न होना सफलता का आधार है।नकारात्मक सोंच के लोगो को पास भी न फटकने दे।मित्रता सदैव साहसी बुद्धिमान एवं विश्वासी लोगो से ही करे।उत्साह बढ़ने वाली साहस  व  हिम्मत से भरी बातो ,कहानियों  घटनाओ से प्रेरणा प्राप्त कर  भौतिक जीवन में ही नहीं अपितु  अध्यात्मिक क्षेत्र में भी  सफलता प्राप्त की जा  सकती  है।सतत प्रयास ही आपकी किस्मत का निर्माण करता है अतः कर्म शील बने। भगवान श्री कृष्ण श्रीमदभागवत गीता में यही कहते है कि कई बार उद्देश्य की प्राप्ति  न होने पर  समर्पण की भावना में  कमी आ जाती  है। परन्तु ईश्वर में पूर्ण  विश्वास रख यदि आप जीवन के कार्यो  को करते है तो  जीवन में सफलता कदम चूमेगी।

अजय सिंह  

Friday, May 3, 2013

परिवर्तन निश्चित है,लेकिन सफलता आपका चुनाव

अरे बच्चे कितनी जल्दी बड़े हो गए पता ही नहीं चला।अभी कल तक तो गोद में खेलते थे आज पढाई पूरी करके नौकरी करने लायक हो गए है। इस तरह की बातचीत अपने अक्सर बड़े और बुजुर्गो के बीच सुनी होगी।अवस्था बदल रही है। कल जो बच्चा था आज नौजवान है।कल का नौजवान आज बूढ़ा हो चला है। बस दुनिया का नियम
यही है और यही है जीवन का सार।कल जो सूरज उगा  था वह आज नहीं है क्योकीं समय बदल गया है, कल कोई और तारीख थी आज कोई और तारीख है।कल जो आप या हम थे हम भी वह नहीं है।यह सच है कि  समय पंख लगा कर उड़ता जा रहा है। और हर रोज हर क्षण  दुनिया में चीजे बदल रही है। वास्तव में हमारी आपकी जिन्दगी की यात्रा बदलाव की कहानी है। परिवर्तन के  इस नियम  को स्वीकार कर अपने जीवन की योजना बनाना सफलता की और बढाया गया आपका एक कदम है। आइये देखे  परिवर्तन हमारे जीवन में  कैसे आशा का संचार करता है,कैसे हमारा उत्साह वर्धन करता है, कैसे हमारी उन्नति का साधन बनता है।
मनुष्य स्वभाव से  बदलाव को साधारणतया स्वीकार करना  नहीं चाहता। हाँ यदि बदलाव से कुछ अच्छा होने का आभास पहले से हो या निश्चित हो तो बात अलग है।नौकरी में प्रोन्नति से जब स्थान परिवर्तन होता है तो आम तौर  पर उसे सहज ही स्वीकार कर लिया जाता है।लेकिन अन्यथा इसकी स्वीकार्यता मुश्किल होती है। साथ ही जैसे - जैसे उम्र बढती है तो बदलाव को स्वीकार करना और कठिन होता जाता है। उदहारण के लिए  माता -पिता के स्थानांतरण के बाद नए शहर में जाने का  अवसर आने की  स्थिति  मे बच्चे प्रायः खुश भी रहते और तैयार भी। वहीं  सेवानिवृति के बाद कई बार ऐसी स्थिति बनती है की माता - पिता को अपने बच्चो के साथ उनके शहर में जाना पड़  जाता है तो उन्हें नए शहर में  नए लोगो के साथ रहना असहज लगता है इसलिये शुरू में इसका स्वाभाविक प्रतिरोध होता है।
आम तौर पर परिवर्तन से  भय का कारण  भविष्य की अनिश्चित्ता  है। लेकिन यदि प्रकृति का परिवर्तन का  नियम आपको याद है और आप खुल कर और खिल कर जीने की आदत बना ले तो अनिश्चित्ता को आप भय के बजाय आश्चर्य से देखना शुरू करेंगे और परिवर्तन की सभी स्थितियों को साक्षी भाव से देखते हुये उसका आंनंद ले सकेंगे। दूसरे  जब आप परिस्थितियो  को भय से  देखते है तो उससे ठीक तरह से डील करने की अपनी पूरी क्षमताओं का उपयोग इसलिए नहीं कर पाते है क्योकिं भय आपको मानसिक रूप से कमजोर कर देता है। और आप कमजोर व्यक्ति की तरह समस्या का हल निकाल रहे होते है इसलिए आपके हारने की सम्भावना भी  बढ़ जाती है।
अतः परिवर्तन के द्वारा उत्पन्न होने वाली स्थितयो से निपटने के  लिए मानसिक और शारीरिक  रूप से अपनी तैयारी रखना, इसे ईश्वर का नियम मान कर इसके प्रति ईश्वरीय श्रद्धा   और शुभ  भविष्य के बारे में आशावान बने रहकर आप सफलता की सीढ़ी चढ़ सकते है। याद रखिये जीवन में आने वाले परिवर्तन नई   परिस्थितिओं को स्वीकार करने और उनसे निपटने में आपके धैर्य और कौशल  की परीक्षा लेते है। इनसे जीत कर ही आप को अपने भविष्य को संवार सकते है। 
क्या आपको आसमान से गिरने वाली उस बूँद की कहानी याद है जो बादलों से अलग होते हुये सोच रही थी की भाग्य में न जाने क्या  होने  वाला है। किसी कमल के फूल या अंगारे में गिरना पड़ेगा या फिर धूल  में गिरकर नष्ट होना मेरी किस्मत में लिखा है। लेकिन परिस्थितियाँ  कुछ ऐसी बदली की बूँद सीप के मुँह में गिरकर मोती बन गई । दुनियाँ में ऐसे अनेक उदहारण है जब परिस्थितवश ऐसा लगता है की शायद कुछ बेहतर होना सम्भव नहीं लेकिन उन्ही परिस्थितियो में अक्सर चमत्कार होते देखे गए है। अतः परिवर्तन को ख़ुशी - ख़ुशी स्वीकार करे और उसे बेहतर बनाने के लिये पूरे मन से काम करे और फिर देखे कि  कैसे  आपकी जिन्दगी  चमत्कारों   से भर जाती है। बस ईश्वर  से  मिलने वाली हर कृपा का धन्यवाद करना न भूले।
अजय सिंह